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श्रीबनारसी "दास" द्वारा रचित प्रस्तुत कृति " काव्यकिञ्जल्क " में अवधी भाषा में देवी-देवताओं की स्तुति की गयी है तथा नन्दजादेवी-शाकम्भरीदेवी -भ्रामरीदेवी के अवतार की कथा वर्णित है। श्रीविन्ध्यवासिनीस्तुति, जय श्रीहनुमान, श्रीहनुमद्-विनय, श्रीकृष्णप्राकट्य, द्रौपदी-पुकार, विन्ध्यक्षेत्रमहिमा, नशा, ...