Premmurti Bharat (Hindi Religious)
662円 भरत के व्यक्तित्व का दर्शन हमें ‘राम वन गमन’ के पश्चात् ही होता है। उसके पहले उनका चरित्र-मूक समर्पण का अद्भुत दृष्टान्त है जिसे देखकर कुछ भी निर्णय कर पाना साधारण दर्शक के लिये कठिन ही था। इसी सत्य को दृष्टिगत रख कर गोस्वामी जी ने ‘राम वन गमन’ के मुख्य कारण के रूप में भरत प्रेम-प्राकट्य को स्वीक...
Kya Dharm? Kya Adharm? (Hindi Self-help)
421円 धर्म और अधर्म का प्रश्न बड़ा पेचीदा है। जिस बात को एक समुदाय धर्म मानता है, दूसरा समुदाय उसे अधर्म घोषित करता है। इस पेचीदगी के कारण धर्म का वास्तविक तत्व जानने वाले जिज्ञासुओं को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। मानवीय बौद्धिक विकास के साथ-साथ 'क्यों और कैसे’ का बहुत प्राबल्य हुआ है। इस युग का म...
Mulla Nasiruddin Ke Chutkule (Hindi Jokes)
164円 मुल्ला नसीरूद्दीन न केवल विनोदी व्यक्ति थे, बल्कि वह अच्छे हकीम भी थे और सामान्य लोगों के सुख-दुःख में सदा भागीदार भी बनते थे, इसलिए वह अत्यन्त लोकप्रिय हुये। ऐसे समझदार आदमी ने अपनी सवारी को चुना था, एक गधा। वह अपने गधे को प्यार भी खूब करता था और गधा भी इतना समझदार था कि मुल्ला के हर इशारे को भा...
Vartman Chunautian Aur Yuvavarg (Hindi Se...
297円 राष्ट्र के प्रत्येक युवा का वर्तमान परिस्थितियों में यही कर्त्तव्य है कि वह अपनी पुरातन संस्कृति से ओतप्रोत अपनी मातृभूमि के उत्थान के लिए कार्य करने वाली वीर संतान बने। वृद्ध लोग सीमित समय के लिए कार्य करते हैं और युवा अनंत समय के लिए। ध्यान रहे सीधे लक्ष्य की ओर बढ़ना है, कमर सीधी कर, दृढ़ होकर अ...
Sugreev Aur Vibhishan (Hindi Religious)
297円 ‘श्रीरामचरितमानस’ में एक ओर श्रीसुग्रीव का चरित है और दूसरी ओर श्रीविभीषण हैं और दोनों के चरित में जो भगवान् का मिलन होता है, उस मिलन में श्रीहनुमान् जी ही मुख्य कारण बनते हैं। फिर भी सुग्रीव और विभीषण के चरित में अन्तर है और इस अन्तर का मुख्य तात्पर्य यह है कि भगवत्प्राप्ति के लिए किसी एक विशेष ...
Unnati Ke Teen Gun Char Charan (Hindi Sel...
164円 समस्त कठिनाइयों का एक ही उद्गम है मानवीय दुर्बुद्धि। जिस उपाय से दुर्बुद्धि को हटाकर सदबुद्धि स्थापित की जा सके, वही मानव कल्याण का, विश्वशांति का मार्ग हो सकता है। युगऋषि परम पूज्य पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने वर्तमान युग की समस्याओं के समाधान हेतु बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं। उनहीं में से एक प...
Meri Kahaniyan-Agyeya (Hindi Stories)
662円 प्रख्यात साहित्यकार अज्ञेय ने यद्यपि कहानियां कम ही लिखीं और एक समय के बाद कहानी लिखना बिलकुल बंद कर दिया, परन्तु हिन्दी कहानी को आधुनिकता की दिशा में एक नया और स्थायी मोड़ देने का श्रेय भी उन्हीं को प्राप्त है। इस संग्रह में इस प्रकार की सभी कहानियां, कहानी-लेखन संबंधी उनके महत्त्वपूर्ण विचारों ...
Vijay, Vivek Aur Vibhuti (Hindi Religious)
421円 तीन वस्तुएँ प्राप्त होती हैं - विजय, विवेक और विभूति, परन्तु किसको? एक शब्द जोड़ दिया गया कि जो ‘सुजान’ हैं। ‘रामायण’ का पाठ और श्रवण तो बहुधा अनेक लोग करते ही रहते हैं, परन्तु गोस्वामीजी ने जो ‘सुजान’ शब्द जोड़ दिया, यह बड़े महत्व का है। कहने वाला भी सुजान हो और सुनने वाला भी सुजान हो, यह गोस्वा...
Meri Kahaniyan-Khushwant Singh (Hindi Sto...
662円 कौन कहता है कि कहानी का अंत हो चुका है? भारत में तो अभी-अभी इसका पुनर्जन्म हुआ है और साहित्यिक पंडितों के अनुसार इसकी जन्मपत्री में लिखा है कि इसकी उम्र बहुत लंबी और समृद्ध होगी। अन्य अनेक विकासशील देशों की तरह भारत में भी कागज की उपलब्धता और प्रिटिंग की तकनीक शुरू होने से पहले साहित्य की दो ही व...
Meri Kahaniyan-Maitreyi Pushpa (Hindi Sto...
662円 जिंदगी को इस तरह नहीं लिया जा सकता कि वह यहाँ से शुरू है और यहाँ खत्म, बहुत सोचने के बाद मेरा यही विचार बना, क्योंकि जहाँ से शुरू का छोर पकड़ती हूँ, वहीं डोर छिटक जाती है। क्या जन्म से मनुष्य का जीवन शुरू होता है ? नहीं, तब तो उसका जीवन माता के हाथों होता है, जिनमें पल-बढ़कर वह कुछ ऐसी बातें सीखत...
Meri Kahaniyan-Amrit Lal Nagar (Hindi Sto...
662円 मृतलाल नागर हिन्दी के उन गिने-चुने मूर्धन्य लेखकों में हैं जिन्होंने जो कुछ लिखा है वह साहित्य की निधि बन गया है। सभी प्रचलित वादों से निर्लिप्त उनका कृतित्व और व्यक्तित्व कुछ अपनी ही प्रभा से ज्योतित है उन्होंने जीवन में गहरे पैठकर कुछ मोती निकाले हैं और उन्हें अपनी रचनाओं में बिखेर दिया है उपन्...
Meri Kahaniyan-Bhishm Sahani (Hindi Stories)
662円 आधुनिक हिन्दी कहानी के सफर में भीष्म साहनी एक महत्वपूर्ण नाम है। उनकी सर्वाधिक प्रिय कहानियों के इस संकलन में जीवन और समाज से गहरे जुड़े प्रश्नों को प्रस्तुत किया गया है। इनमें से अनेक कहानियाँ बेहद चर्चित हुई हैं। ‘आधुनिकता-बोध की जिस कसौटी पर कहानी को परखा जाने लगा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। जह...
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