662円
जब महाभारत कभी उत्कीर्ण होगा, शिलाओं पर कर्ण का गौरव खुदेगा, पीढ़ियाँ गाती रहेंगी शौर्यगाथा, कर्ण, तुम तो तुम्हीं हो, अनुपम अनन्वय। प्रस्तुत लम्बी कविता में कवि की प्रांजल मेधा का ओजस्वी रूप प्रगट हुआ है। संश्लिष्ट शब्द चित्रों द्वारा पात्र के संघर्षपूर्ण मनोगत को अनेक फलकों पर चित्रांकित करने मे...