Sambhavami Yuge Yuge-1 (Hindi Novel)
662円 मैं तो महाभारत के दूसरे भाग को पढ़ने के लिए उत्सुक था, अतः उसी रात वह पुलिन्दा निकाल पढ़ने लगा। उसमें लिखा था मैंने इस कथा के पूर्वांश में लिखा था कि पांडु-पुत्रों को धृतराष्ट्र के पुत्रों के समान मान और स्थान मिल जाने पर, मैं निश्चिन्त हो गया था। मैंने समझा कि कुरुवंशियों का विनाश, जिसका इन्द्र ...
Pragatisheel (Hindi Novel)
662円 वर्तमान युग में ‘प्रगतिशील’ एक पारिभाषिक शब्द हो गया है। इसका अर्थ है योरप के सोलहवीं शताब्दी और उसके परवर्ती मीमांसकों द्वारा बताए हुए मार्ग का अनुकरण करने वाला। इनमें से अधिकांश मीमांसक अनात्मवादी थे। इनके अनात्मवाद के व्यापक प्रचार का कारण था ईसाईमत का अनर्गल आत्मवाद, जो केवल निष्ठा पर आधारित ...
Main Naa Manu (Hindi Novel)
662円 अभिमानी का सिर नीचा होता है, परन्तु इस संसार में ऐसे लोग भी हैं जो सिर नीचा होने पर भी, उसको नीचा नहीं मानते। ऐसे लोगों के लिए ही कहावत बनी है‘रस्सी जल गई, पर बल नहीं टूटे’। इसका कारण मनुष्य की आद्योपांत विवेक-शून्यता है। विवेक अपने चारों ओर घटने वाली घटनाओं के ठीक मूल्यांकन का नाम है। मन के विका...
Panigrahan (Hindi Novel)
662円 संस्कारों से सनातन धर्मानुयायी और शिक्षा-दीक्षा तथा संगत के प्रभाव के कारण प्रतीची विचारों से प्रभावित इन्द्रनारायण तिवारी की मानसिक अवस्था एक समस्या बनी रहती थी। इन्द्रनारायण के पिता रामाधार तिवारी जिला उन्नाव के एक छोटे से गाँव दुरैया में पुरोहिताई करते थे। दुर्गा, चंडी-पाठ, भागवत-पारायण, रामाय...
Avtaran (Hindi Novel)
662円 हिन्दुओं में यह किंवदंति है कि यदि महाभारत की कथा की जाये तो कथा समाप्त होने से पूर्व ही सुनने वालों में लाठी चल जाती है। एक बार हमारे मुहल्ले के एक मन्दिर में महाभारत की कथा रखायी गयी। यह वे दिन थे, जब आर्यसमाज और सनातनधर्म सभा में शास्त्रार्थों की धूम थी। मुहल्ले के कुछ सनातनधर्मी युवको में धर्...
Prarabdh Aur Purusharth (Hindi Novel)
662円 प्रारब्ध है पूर्व जन्म के कर्मों का फल। फल तो भोगना ही पड़ता है, परन्तु पुरुषार्थ से उसकी तीव्रता को कम किया जा सकता है अथवा यह भी कह सकते हैं कि उसको सहन करने की शक्ति बढ़ाई जा सकती है। ‘‘प्रारब्ध और पुरुषार्थ’’ का यही कथानक है। अकबर के जीवन के एक पृष्ठ को आधार बनाकर रचा गया अत्यन्त रोचक उपन्यास...
Dharti Aur Dhan (Hindi Novel)
662円 बिना परिश्रम धरती स्वयमेव धन उत्पन्न नहीं करती। इसी प्रकार बिना धरती (साधन) के परिश्रम मात्र धन उत्पन्न नहीं करता। इस विषय पर एक अनुपम और रोचक उपन्यास।
Aaj Abhi (Hindi Drama)
662円 इस पुस्तक के तीनो नाटकों में एक बहुत ही सामयिक और महत्त्वपूर्ण थीम को उठाया गया है। दहेज के सवाल पर हर स्तर पर कुछ न कुछ लिखा जाना चाहिए लेखक ने इस समस्या पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए नाटक का सहारा लिया। भाषा में बहुत कसावट है और नाटकीयता भी है। प्रारम्भिक दृश्य बड़े सघन लगते हैं और कार्य-व्याप...
Aahuti (Hindi Drama)
662円 तरुणी हेमा और राजीव का आपसी प्रेम हेमा को समय से पहले गर्मवती बना देता है। राजीव के ठुकराने पर हेमा आत्म हत्या के लिए उद्दत होती है, पर कालेज प्रिंसिपल रवीन्द्रनाथ कुछ और ही सोच रहे हैं। रंगमंच के लिए प्रस्तुत इस नाटिका में दर्शकों को अंत तक बाँधे रहने की सहज क्षमता है।
Sambhavami Yuge Yuge-2 (Hindi Novel)
662円 पांडवों के खांडव क्षेत्र में चले जाने के पश्चात् मुझको धृतराष्ट्र का निमंत्रण मिला। मैं वहां गया तो महाराज के पास दुर्योधन, दुःशासन और कर्ण बैठे हुए थे। मैंने प्रणाम किया तो महाराज धृतराष्ट्र ने बैठने का आदेश दे दिया। मेरे बैठने पर दुर्योधन ने मुझको सम्बोधन करके कहा, ‘‘तात्! हमको ज्ञात हुआ है कि ...
Banvaasi (Hindi Novel)
662円 ‘वनवासी’ का अभिप्राय उस वनवासी से नहीं है जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भाँति वन में वास करने के लिए चला जाता है अथवा अपना घर बार छोड़कर संन्यास ग्रहण कर वनों में जाकर तपस्या करता है। ‘वनवासी’ ऐसी वन्य जाति की कहानी है जो आदिकाल से पूर्वांचल के वनों में वास करते आ रहे हैं। जैसाकि हमने कहा है, उनके...
Do Bhadra Purush (Hindi Novel)
662円 एक लखपति था और दूसरा मज़दूर। एक ठेकेदार था, दूसरा स्कूल-मास्टर। एक नई दिल्ली में बारहखम्भा रोड पर दुमंजिली कोठी पर रहता था, दूसरा बाज़ार सीताराम के कूचा पातीराम की अँधेरी गली के अँधेरे मकान में। एक मोटर में बैठकर काम पर जाता था तो दूसरा बाइसिकल पर। एक उत्तम विलायती वस्त्र धारण करता था दूसरा खद्दर...
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